
जब भारत अपने सैनिकों के कंधे मज़बूत कर रहा है, ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवाद की रीढ़ तोड़ रहा है — उसी वक़्त अमेरिका अपने पुराने दोस्त तुर्की को वो मिसाइलें थमा रहा है, जो पाकिस्तान पहले भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर चुका है।
अब सवाल ये नहीं कि अमेरिका तुर्की को AMRAAM दे रहा है। सवाल ये है कि क्या अमेरिका को पाकिस्तान और तुर्की का ब्रोमांस नहीं दिखता? या फिर वो दिखकर भी अंधा बनना चाहता है?
तुर्की को कौन-कौन से हथियार मिल रहे हैं?
-
53 AIM-120C-8 एडवांस मीडियम रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (AMRAAM)
-
6 गाइडेंस सिस्टम
-
60 AIM-9X साइडवाइंडर ब्लॉक II मिसाइलें
-
11 टैक्टिकल गाइडेंस यूनिट्स
कुल सौदा: 300 मिलियन डॉलर से अधिक
इन मिसाइलों की खासियत यह है कि ये मैक 4 की रफ्तार से उड़ती हैं, 180 किमी दूर से लक्ष्य भेद सकती हैं और किसी भी मौसम में काम कर सकती हैं।
AMRAAM: भारत के लिए चिंता क्यों?
2019 में बालाकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने F-16 से AMRAAM दागे थे — जिनके अवशेष भारत के पास सबूत के तौर पर मौजूद हैं।
अब वही AMRAAM तुर्की को मिल रहा है — और तुर्की कौन है? वही जो पाकिस्तान को ड्रोन, स्पेयर पार्ट्स और नैरेटिव सपोर्ट दे चुका है।
भारत की चिंता यही है — क्या ये मिसाइलें एक दिन पाकिस्तान की गोद में गिरेंगी?

अमेरिका की “डील पॉलिसी”: कूटनीति कम, कमीशन ज़्यादा
-
अमेरिका कहता है कि ये डील नाटो के लिए है।
-
भारत कहता है कि पाकिस्तान के पर्सनल नाटो में तुर्की नंबर वन है।
यह वही अमेरिका है जो “इंडो-पैसिफिक में भारत सबसे अहम साझेदार है” कहता है — और पीछे से दुश्मन के दोस्त को हथियार देता है।
क्या भारत को प्रतिक्रिया देनी चाहिए?
-
डिप्लोमैटिक विरोध दर्ज कराना ज़रूरी है।
-
टेक्नोलॉअपग्रेड की रफ्तार और तेज करनी होगी।
-
अमेरिका पर निर्भरता घटाकर फ्रांस, इज़राइल और घरेलू रक्षा प्रोडक्शन पर ज़ोर देना होगा।
अमेरिका का हथियार प्रेम अंधा नहीं, चालाक है। उसे फर्क नहीं पड़ता कि गोली किसे लगती है — बस सौदा होना चाहिए।
भारत को अब ये समझना होगा कि सिर्फ दोस्ती के बयान नहीं, खरीद-बिक्री की नीयत भी तौली जाती है।
“जब तुम बंदूक लिए खड़े हो और दोस्त बारूद बेच रहा हो — तो समझ जाओ, बारूद किसके खिलाफ जाएगा, ये तुम तय नहीं करोगे।“
बलिया में BJP नेता बब्बन सिंह का अश्लील डांस वीडियो वायरल
